उम्मीद के खत
मित्र/अजनबी,
हम कुछ भी तो नहीं आपके फिर यह खत !
यही सोचते होंगे आप आज कोई अपनों को खत नहीं लिखता तो मुझे ! किसके पास इतना समय है जो खत लिखे? पर आपके चेहरे पर मुस्कान खिल गई इस उम्मीद से कि किसी अपने का खत आया है आपके लिए। बस इसलिए।
जीवन के सफर में भागते हुए हर मोड़ पर मंजिल मिली कभी नहीं भी मिली। मन उदास में हुआ पर भागते हुए गिर भी जाएंँ तो निराश ना होना बस उठ कर अपने कपडों की धूल झड़ा पुनः चल पड़ना । रिश्तों में भी दो पल की नाराजगी और फिर बात करना। यही तो सिखाते हैं बच्चे हमें।
कैसे उड़ते हुए प्लेन/तेज भागती ट्रेन में बैठे अजनबीयों के साथ भागते हुए हाथ हिलाकर संकेत देते और एक स्माइल उस ओर से सभी चेहरे पर।
बस जिंदगी का सफर भी ऐसा ही है।
मिलें तो सहज सरल मुस्कान के साथ।
आपकी शुभचिंतक
शैलजा
Seema Priyadarshini sahay
30-Sep-2021 06:19 PM
वाह बहुत खूबसूरत पत्र
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